🪷Paṭisallāna Sutta -
“शांति की तलाश: भीतर की ओर”
भीड़ में रहकर भी जो खुद से दूर हो जाता है,
वो कभी शांति का असली स्वाद नहीं पाता है…
जब मन हर पल बाहर की दुनिया में भटकता है,
तब अंदर का सन्नाटा भी शोर बन जाता है…
हर तरफ़ शब्द ही शब्द,
पर सुकून कहीं नहीं…
हर चेहरा मुस्कुराता हुआ,
पर दिल अंदर से खाली…
तभी एक धीमी सी आवाज़ भीतर से आती है—
“थोड़ा ठहरो… खुद के पास आओ…”
Paṭisallāna का यही सार है,
कि असली सुख ना शब्दों में है, ना भीड़ में,
वो तो उस एकांत में छुपा है
जहाँ तुम और तुम्हारा मन आमने-सामने होते हो…
जब इंसान खुद के साथ बैठना सीख जाता है,
तो दुनिया के हर सवाल का जवाब
खुद-ब-खुद मिलने लगता है…
कभी-कभी दूरी बनाना जरूरी है—
दुनिया से नहीं,
उस शोर से जो हमें खुद से दूर कर देता है…
जब तुम अकेले बैठते हो,
और अपने विचारों को बिना डर के देखते हो,
तभी असली ध्यान शुरू होता है…
वो पल जब ना कोई दिखावा होता है,
ना कोई बनावट,
बस तुम होते हो
और तुम्हारा सच्चा स्वरूप…
यही वो जगह है
जहाँ दुख भी समझ आता है,
और उससे निकलने का रास्ता भी…
ना कोई दौड़, ना कोई दिखावा,
बस एक शांत सा एहसास…
जहाँ हर सांस में सुकून होता है,
और हर खामोशी में सच्चाई…
जो खुद को समझ गया,
वो दुनिया को जीत गया…
इसलिए भागना बंद करो,
रुकना सीखो…
कभी-कभी सब कुछ छोड़कर
खुद में खो जाओ…
क्योंकि Paṭisallāna का असली अर्थ यही है—
“भीड़ से नहीं… खुद से जुड़ना…” 🌙🧘♂️✨
🪷 बुद्धं शरणं गच्छामि
🪷 धम्मं शरणं गच्छामि
🪷 संघं शरणं गच्छामि
